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جمعہ, جولائی 08, 2022

कुर्बानी और हमारी सामाजिक दायित्व

कुर्बानी और हमारी सामाजिक दायित्व
क्षेत्र की प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय संगठन "तंजीम तहफफुजे शरीअत व वेल्फेयर सोसाइटी जोकीहाट" के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक नववा नंकार में बुलाई गई जिसमें कुर्बानी और उसके संबंध में जानकारियां दी गई। 
संगठन के प्रवक्ता श्री अब्दुस सलाम आदिल नदवी ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि यह बैठक लोगों में जागरूकता लाने के लिए बुलाई गई है कि लोग कुर्बानी के दिनों में विशेष तौर पर सफाई का ध्यान दें और अपने हमवतन भाइयों का खयाल रखें कि उनको कोई तकलीफ ना पहुंचे। संगठन के सचिव मौलाना अब्दुल वारिस ने कहा कि प्राचीन काल से ही सभी धर्म के मानने वालों पर बलिदान अनिवार्य रहा है, ऐसा नहीं है कि केवल इस्लाम धर्म में ही कुर्बानी की प्रथा प्रचलित है। बलिदान के प्रमाण सभी धर्मों में मिलते हैं।आज भी लोग भगवान के नाम पर बलिदान चढ़ाते हैं, भले ही उनकी शैली अलग हो।
प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान श्री अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी ने कहा कि तमाम धार्मिक ग्रंथों में बलिदान का उल्लेख है। आदम अलैहिससलाम से लेकर हजरत मोहम्मद तक जितने नबी और अवतार ने इस धरती पर जन्म लिया सब के समर्थकों को बलिदान करने का आदेश दिया गया था। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की के कहा वह उन जानवरों की कुर्बानी ना दें जिन से हमारे भाइयों का आस्था जुड़ी हुई है। 
बैठक में  क्षेत्र की प्रसिद्ध शख्सियतें मुफ्ती सुलेमान नंववा नंकार, कारी इम्तियाज साहेब, कारी मंजूर साहेब, मौलाना तलहा, अब्दुल कुददूस राही, मास्टर खालिद सबा, मास्टर शमशाद साहब, इत्यादि ने मौजूद थे।

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